★ माइटोकॉन्ड्रिया एवं लवक (क्लोरोप्लास्ट, क्रोमोप्लास्ट, ल्यूकोप्लास्ट) दोहरी झिल्ली से घिरे कोशिकांग हैं।
★ केन्द्रक, कोशिका में पाया जाने वाला सबसे बड़ा कोशिकांग है।
★ राइबोसोम एवं सूक्ष्म तन्तु कोशिका में पाये जाने वाले सबसे छोटे कोशिकांग हैं।
★ एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम को इरगेस्टोप्लाज्म भी कहा जाता है।
★ सर्वप्रथम ल्यूवेनहॉक ने केन्द्रक एवं क्लोरोप्लास्ट को कोशिकाओं के अन्दर देखा, परन्तु इनके खोज का श्रेय उन्हें नहीं दिया जाता। * कोशिका के अंदर जीवित वस्तुओं को कोशिकांग एवं मृत वस्तुओं को कोशिका अंतस्थ कहते हैं।
★ कोशिका झिल्ली के बाहर पाया जाने वाला आवरण ग्लाइकोकैलिक्स कहलाता है। यह कोशिका को इम्यूनो आइडेंटिटी प्रदान करता है। ★ कोशिका के अंदर जीवद्रव्य हमेशा गतिशील होता है। इसे जीवद्रव्य भ्रमण (Cyclosis) कहते हैं।
* लकड़ी (Wood) वानस्पतिक रूप से द्वितीयक जाइलम होती है। इनकी कोशिका भित्ति पर लिग्निन का अत्यधिक जमाव हो जाता है। यहाँ तक कि पूर्ण परिपक्व लकड़ी कोशिकाओं के जीवद्रव्य पूर्ण रूपेण नष्ट हो जाते हैं।
★ एक माइटोकॉण्ड्रिया का जीवन काल 5-10 दिन का होता है।
★ क्लोरोप्लास्ट एवं माइटोकॉण्ड्रिया में DNA, RNA एवं राइबोसोम्स पाये जाते हैं। अतः इन्हें अर्द्धस्वाशासित कोशिकांग कहा जाता
हैं। ये अपने लिए आवश्यक प्रोटीन स्वयं बनाते हैं।
* कोशिका के अन्दर पाये जाने वाले समस्त कार्बनिक एवं अकार्बनिक अजीवित पदार्थों को कोशिका अंतस्थ कहा जाता है। ★ पादप कोशिकाओं में जन्तु कोशिकाओं की अपेक्षा कम माइटोकॉण्ड्रिया पाये जाते हैं।
★ गुणसूत्र रासायनिक रूप से न्यूक्लिओप्रोटीन के बने होते हैं। ★ क्रोमैटिन जालिका की इकाई को न्यूक्लिओसोम कहते हैं।
गुणसूत्र आनुवंशिक गुणों के वाहक होते हैं। प्रोकैरियोट्स में न्यूक्लिओप्रोटीन के बने क्रोमैटिन जालिका अथवा क्रोमोसोम नहीं पाये जाते हैं।
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