यह भाग सामान्यतः भूमि के अन्दर विकसित और मूला * द्विबीजपत्री पादपों में मूसला तथा एकबीजपत्री पादपों में अपस्थानिक जहुँ पायी जाती है।
★ प्ररोह तन्त्र का मुख्य अक्ष बना कहलाता है, यह भ्रूण के प्रांकुर से विकसित होता है।
*तना प्रकाश की ओर तथा बड़ भूमि व गुरुत्वाकर्षण के विपरीत वृद्धि करता है। ★ तने के संघनित रूप को कलिका कहते हैं।
★ पौधे के प्ररोह का पर्वसन्धियों से निकलने वाले असमान उपगों को पत्ती कहते हैं।
* द्विबीजपत्री पादपों की पत्तियों में जालिकावत् तथा एकबीजपत्री पादपों की पत्तियों में समानान्तर शिराबियात पाया। ★ पुष्प एक रूपान्तरित प्ररोह है जो प्रजनन में भाग लेता है।
★ यह एक डण्ठल द्वारा तने की शाखा से जुड़ा रहता है, जिसे पुष्पवृक्त (Pedicel) कहते हैं।
★ पुष्पवृत्त का ऊपरी चपटा भाग जिस पर पुष्प के सभी भाग लगे होते हैं, पुष्पासन कहलाता है।
★ पुष्प चार भागों बाह्रादल, दल, जायांग एवं पुमंग का बना होता है। ★ जिस । में चारों भाग पाये जाते हैं, उसे पूर्ण पुष्प (Complete flower)
पुष्प कहते हैं। ★ जिस पुष्प में चार में से कोई भी एक अंग नहीं पाया जाता, उसे अपूर्ण पुष्प (Incomplete flower) कहते हैं। ★ पुष्प के अंग विशेष कार्यों को करने के लिए रूपान्तरित पत्तियाँ है, इस कारण इन्हें पुष्पीय पत्र कहते हैं।
★ जब किसी पुष्प में पुष्मीय पत्रों की संख्या समान या आपस में गुणज में होती है तब इसे समावयवी (Isomerous) पुष्प कहते हैं। जर यह संख्या में दो होती है तब इन्हें द्वितयी (Bimerous) तीन में होने पर तृतयी (Trimerous) चार में होने पर चतुथों (Ter ous) कहते हैं।
★ जब किसी पुष्प में पत्रों की संख्या अलग-अलग होती है, तब इसे विषभावयवी (Heteromerous) कहते हैं। ★ जब किसी पुष्प के विभिन्न पुष्पीय पत्र चक्रों में व्यवस्थित होते हैं, तब इसे चक्रीय (Cyclic) पुष्प कहते हैं।
जब पुष्प का पुष्पासन लम्बा हो जाता है तथा पुष्पपत्र उसके ऊपर सर्पिल क्रम में लगे होते हैं तब इस पुष्प को अचक्रीय पुष्प (cyli flower) कहते हैं।
★ जब किसी पुष्प के कुछ पुष्पीय पत्र चक्रीय तथा कुछ अचक्रीय क्रम में लगे होते हैं तब इसे अर्धचक्रीय पुष्प कहते हैं। ★ पुष्प जिन पत्तियों के कक्ष से निकलता है उन्हें सहपत्र (Bracts) कहते हैं।
★ बोगनवेलिया में पुष्प के समान दिखाई देने वाला रंगीन भाग सहपत्र ही होता है।
★ पुष्प के बाह्यदलों के चक्र को बाह्यदलपुंज तथा दलों के चक्र को दलपुंज कहते हैं। ★ पुमंग कई एककों का बना होता है, जिसे पुंकेसर (Stamen) कहते हैं।
★ प्रत्येक पुंकेसर तीन भागों का बना होता है- परागकोष, योजी और पुतन्तु ।
★ जायांग भी कई एककों का बना होता है जिसे स्त्रीकेसर (Pistil) या अण्डप (Carpel) कहते हैं। ★ प्रत्येक अण्डप तीन भागों- अण्डाशय (Ovary), वर्तिका एवं वर्तिका का बना होता है।
★ पुमंग पुष्प का नर एवं जायांग पुष्प का मादा जनन अंग होता है।
★ पादप प्ररोह का वह भाग या शाखा जिससे पुष्प निकलते हैं, पुष्पावली वृत्त (Peduncle) कहलाता है। ★ पुष्पावली वृन्त पर पुष्पों के लगने के क्रम को पुष्पक्रम कहते हैं।
★ कुछ पौधों में पुष्प समूहों में व्यवस्थित न रहकर अकेले रहता है, तब इसे एकल पुष्प कहते हैं।
★ जब एकल पुष्प पुष्पावली वृत्त के शीर्ष से निकलता है, तब इसे एकल शीर्षस्थ लेकिन जब यह पत्ती के कक्ष से निकल एकल कक्षस्य कहते हैं।
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