शैवाल असंवहनी पादप है जो कि प्रायः जल में पाये जाते हैं।


ब्रायोफाइट्स को "पादप जगत का उभयचर" कहा जाता है क्योंकि ये नम भूमि पर पाये जाते हैं तथा इनकी वृद्धि एवं विकास तथा


निषेचन हेतु जल अति आवश्यक होता है। टेरिडोफाइट्स संवहनी क्रिप्टोगेम्स होते हैं।


टेरिडोफाइट्स एवं जिम्नोस्पम्स के जाइलम में वाहिकाओं (Vessels) तथा फ्लोएम में सखि कोशिकाओं (Companian cells) का अभाव होता है। ये दोनों संरचनायें आवृत्तबीजी पौधों के जाइलम में पाई जाती हैं।


बेंथम एवं हूकर का वर्गीकरण एक प्राकृतिक वर्गीकरण है।


हरे पौधे अकार्बनिक पदार्थों जैसे- CO, H, O, खनिज तत्व आदि की सहायता से अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं, अतः उन्हें


उत्पादक कहा जाता है। उत्पादकों द्वारा निर्मित भोजन पर समस्त जीवमण्डल निर्भर है।


पौधे भोजन निर्माण हेतु आवश्यक ऊर्जा सूर्य को प्रकाश से ग्रहण करते हैं।


सभी शैवाल थैलोफाइटा प्रभाग के अन्तर्गत आते हैं। इनका शरीर जड़, तना तथा पत्ती में विभक्त नहीं होता है। ब्रायोफाइटा को पादप जगत का जलस्थली (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि इस प्रभाग के पौधे जल तथा स्थल दोनों में रह सकते हैं।


टेरिडोफाइट्स स्थलीय पौधों का प्राचीनतम समूह है। ट्रैकियोफाइटा के अन्तर्गत टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म आते हैं, जिनमें काष्ठ अथवा जाइलम एलिमेंट्स पाये जाते हैं। एम्ब्रियोफाइटा के अन्तर्गत ब्रायोफाइट्स, टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म आते हैं, जिनमें जायगोट से भ्रूण का


विकास होता है। क्लोरोफाइय समूह के शैवालों को हरे शैवाल, फिपोफाइय को भूरे शैवाल तथा रोडोफाइट समूह के शैवालों को लाल शैवाल कहा जाता है।


थैलोफाइटा तथा ब्रायोफाइटा में संवहनी ऊतक नहीं पाये जाते हैं।। थैलोफाइटा में (कुछ पौधों को छोड़कर) सामान्यता पीढ़ी एकान्तरण नहीं पाया जाता। स्पोरोफाइटिक अवस्था केवल जायगोट तक


ही सीमित होता है। शेष पादप शरीर गैमिटोफाइटिक होता है। ब्रायोफाइटा में पीढ़ी एकान्तरण पाया जाता है। परन्तु सभी ब्रायोफाइट्स में गैमिटोफाइटिक अवस्था प्रभावी होती है।


टेरिडोफाइट्स में स्पोरोफाइटिक अवस्था प्रभावी होती है। टेरिडोफाइट्स, जिम्नोस्पर्म तथा एन्जियोस्पर्म में गैमिटोफाइटिक अवस्था का क्रमशः ह्रास होता जाता है।


कवक को प्रारम्भ में पादप जगत के अन्तर्गत रखा गया था, परन्तु अब इसे एक नये जगत में रखा गया है। कवक वास्तव में पौधों तथा


जन्तु के बीच की कड़ी होती है।


जन्तुओं के समान कबकों में संचित भोजन ग्लाइकोजन के रूप में पाया जाता है। ये विषमपोषी होते हैं, अर्थात् क्लोरोफिल की अनुपस्थिति के कारण अपना भोजन स्वयं नहीं बना पाते। म्यूकर तथा राइजोपस नामक कवक सामान्यतया डबलरोटी तथा चमड़े पर उगते हैं अतः इन्हें 'ब्रेड मोल्ड' कहा जाता है।


फ्यूनेरिया में पायी जाने वाली पत्ती तथा तना के समान रचनाएँ वास्तविक पत्तियाँ तथा तने नहीं होते बल्कि ये उनके सदृश्य रचनाएँ हैं। सिलैजिमेला एक विषमबीजाणुक टेरिडोफाइट है जिसमें दो प्रकार के स्पोर्स, माइक्रोस्पोर्स तथा मेगास्पोर्स पाये जाते हैं। टेरिडोफाइटा तथा जिम्नोस्पर्म में प्रजनन के समय बनने वाली विशेष संरचनाओं को शंकु अथवा कोन अथवा स्ट्रोबिलस (Smobilles or Cone) कहते हैं। जिम्नोस्पर्म में मादा गैमिटोफाइट अगुणित (Haploid-n) होता है जबकि एन्जियोस्पर्म में ये त्रिगुणित (Triploid-3n) होते हैं।

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