पुष्पीय पादपों की आकारिकी (291


★ पुष्पक्रम चार प्रकार का होता है-सरल पुष्पक्रम, संयुक्त पुष्पक्रम, विशिष्ट पुष्पक्रम तथा मिश्रित पुष्पक्रम।


★ सरल पुष्पक्रम वह पुष्पक्रम है, जिसमें पुष्पावली वृन्त शाखित नहीं होता। यह दो प्रकार का हो सकता है-असीमाक्ष तथा ससीमा ★ असीमाक्ष वह पुष्पक्रम है, जिसमें पुष्पावली वृत्त को शीर्षस्थ कलिका पुष्प नहीं बनाती तथा जिसके पुष्पवृन्त की लम्बाई हमेशा बढ़ती रहती है।


★ ससीमाक्ष वह पुष्पक्रम है, जिसमें पुष्पावली वृत्त को शीर्षस्थ कलिका पुष्प में रूपान्तरित होकर इसको वृद्धि को अवरुद्ध कर देती है। ★ संयुक्त पुष्पक्रम में पुष्पावली वृन्त शाखित होता है और इसको प्रत्येक शाखा पर एक स्वतन्त्र पुष्पक्रम माया जाता है।


★ विशिष्ट पुष्पक्रम में पुष्पावली वृन्त विशिष्ट रूप में परिवर्तित हो जाता है, जिस पर पुष्प विशिष्ट क्रम में लगे होते हैं।


★ मिश्रित पुष्पक्रम वह पुष्पक्रम है, जिसमें एक ही पुष्पावती वृन्त पर दो प्रकार के पुष्पक्रम लगे होते हैं। ★ अंजीर, गूलर, बरगद का फल जैसा दिखने वाला गोलाकार भाग एक पुष्प या फल न होकर पूरा पुष्पक्रम है, जिसके अन्दर विशिष्ट क्रम में पुष्प लगे होते हैं।


★ गेंदा, सूर्यमुखी तथा सेवन्ती का पुष्प जैसा दिखने वाला भाग एक पुष्प न होकर सैकड़ों पुष्पों का समूह अर्थात् पुष्पक्रम है।


★ एक फूलगोभी पूरा पुष्पक्रम है, जो संयुक्त कोरिम्ब कहलाता है।


* प्याज के पौधे में पुष्पाक्ष भूमिगत तने से निकलने वाली पत्तियों के बीच से निकलता है, जिसे स्केप (Scape) कहते हैं, जबकि इस प्रकार


का पुष्पक्रम स्केपीजेरस (Scapigerous) पुष्पक्रम कहलाता है। ★ परिपक्व अण्डाशय फल तथा परिपक्व बीजाण्ड बीज बनाता है।


★ फल, फलभित्ति एवं बीज का बना होता है।


★ बीज बीजावरण, भ्रूणपोष तथा भ्रूण का बना होता है। बीज के अन्दर पादप भ्रूण के रूप में सुरक्षित रहता है। ★ निषेचन के बाद द्वितीयक केन्द्रक धूणपोष का निर्माण करता है, जिसकी सभी कोशिकाएँ त्रिगुणित होती हैं।


★ भ्रूणपोष विकसित हो रहे भ्रूण को पोषण प्रदान करता है।


★ बीजों के अंकुरण के समय भ्रूण ही विकसित होकर पादप बनाता है।


* बीजों में अंकुरण दो विधियों द्वारा होता है, अधोभूमिक अंकुरण तथा उपरिभूमिक अंकुरण । * अधोभूमिक वह अंकुरण है, जिसमें अंकुरण के बाद अंकुरित हो रहे बीजों के बीजपत्र भूमि की सतह के ऊपर नहीं आते।


* उपरिभूमिक वह अंकुरण है, जिसमें अंकुरण के बाद अंकुरित हो रहे बीजों के बीजपत्र भूमि की सतह के ऊपर जा जाते हैं।


* फलों तथा बीजों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना प्रकीर्णन या विकिरण कहलाता है।


* प्रकीर्णित करने वाले माध्यम के आधार पर फलों तथा बीजों का प्रकीर्णन चार विधियों द्वारा होता है- (1) जन्तुओं द्वारा, (ii) वायु


द्वारा, (th) पानी द्वारा तथा (iv) विस्फोटन द्वारा।


मनुष्य भी अपनी स्वार्थपूर्ति के लिए फलों तथा बीजों का प्रकीर्णन करता है।


* कुछ फलों तथा बीजों में प्राकृतिक प्रकीर्णन को सम्पन्न करने के लिए कुछ विशिष्ट रचनाएँ तथा प्रक्रियाएँ पायी जाती है। आवृत्तबीजी पादपों में निषेचन की क्रिया स्त्रीकेसर के अण्डाशय के बीजाण्ड के भ्रूणकोष (Embryo sac) में होती है।

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